Tuesday, November 3, 2009
जिन्दा जलती नारियां
कहंने को तो कहाजाता है की नारी देवी का रूप होती है । किंतु पुरूष प्रधान इस देश को न जाने क्या हो गया है की वे देवियो के ही दुसमन बन बैठे है । आज जब महिलाऐं देश और प्रदेश की सत्ता में है । अन्तरिक्ष तक का सफर कर रही है । यानि पुरुषों से किसी भी मामले कमतर नही है फिर भी वे तमाम जिल्लाते झेलने को विवश है क्यूँ ? आए दिन महिलाओं के साथ होरहे दुराचार , दहेज़ लोभियो के द्वारा उन्हें जिन्दा जलने , जैसी घटने आम होती जा रही है । मेरे घर में जब अखबार आता है तो सुबह सबसे पहले मै ही खोलती हूँ और पता नही क्यूँ मै सबसे पहले अखबार की मोटी हेदिगो में यही तलाशती हु की देखे आज कौन सी महिला हैवान होचुके पुरुषों किभेत चढी है । ऐसी खबरे रोज रोज देखते जैसे मन में अजीब सा भय समां गया है । महिलाओ के उत्पीडन के खिलाफ कानून भी बने है किंतु उसका पालन कराने के लिए यह पुरूष समाज ही ओहदे पर बैठा है । मै ये नही कहती की सरे पुरूष महिला विरोधी ही है किंतु अगर वे ईमानदारी से अपनी ड्यूटी कर रहे है तो आख़िर जितनी तेजी से महिलाओ के उत्पीडन की खबरे आ रही है उतनी तेजी से अरोपितो के सज़ा की खबरे क्यूँ नही आरही है । क्या मीडिया के लोग सज़ा वाली खबरे नही छपते या फ़िर दरिंदो पर कोई कार्रवाई नही होती । आप सोछ रहे होंगे की आखिर मै यह सब क्यूँ बाद बकते जारही हु । बताडू की मै जौनपुर में रहती हु और खास कर इस जिले में मेलों को जलने और उनके साथ दुरचा की घटनाओ के बाद अरोपितो पर क्या हो रहा है यह जानने के लिए काफी दिनों से नज़रें गराए हु पर ऐसी कोई ख़बर अज तक नही मिली की अमुक कातिल , दुराचारी को सज़ा मिली है मिया इस विषय पर बेहद संजीदा रहती हु और यही वज़ह है की अज मै अपनी पहली ब्लॉग पोस्ट भी इसी विषय से सुरु की ।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
आपकी सार्थक सोच है .....आप लेखनी नियमित रखे अच्छा लगेगा
ReplyDelete